लफददू क्या है? “लफददू लाल” के रोमांचक किस्से

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लफददू शब्द का अर्थ क्या है?

दरअसल लफददू शब्द का प्रयोग एक ऐसे व्यक्ति की व्याख्या करने के लिए किया जाता है जो आलसी और लेट-लतीफ़ किस्म का इंसान हो। ऐसे लोगों को अपने आस-पास कि दुनिया की कोई खबर नहीं होती ऐसे लोग अकसर किसी काम के नहीं होते नाही ज़िन्दगी के किसी मुश्किल मुकाम के लिए तैयार होते है। ऐसे लोग यह जताते हैं की उनको दुनिया की सच्चाई की परख है लेकिन जब ज़िन्दगी इन पर ताप बरसाती है तो यह तुरंत घबरा जाते हैं और यह समझ नहीं पाते कि अपनी परेशानी से कैसे बाहर आएं। कई बार यह भी देखा गया है कि ऐसे लोग अपनी ही दुनिया में खोये रहते हैं और कई ज़रूरी बातों को या तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं या तो तुरंत भूल जाते हैं।

नहीं समझे? तो चलिए आपको एक कहानी सुनाते हैं, आखिर एक कहानी से ज़्यादा मज़ेदार और क्या हो सकता है? हर कहानी में एक संदेश छिपा होता है। हमारे पास भी आपके लिए एक ऐसी ही कहानी है। भरोसा रखिये कहानी छोटी और दिलचस्प है और आपको पकाऊ तो बिलकुल भी नहीं  लगेगी (उम्मीद तो हमारी कुछ ऐसी ही है) ।

लफददू लाल कि कहानी…

तो, चलिए शुरू करते हैं अपनी कहानी को। एक बार की बात है, इसी भारत देश में 62 साल का एक वृद्ध पुरुष रहता था। वह व्यक्ति अपनी वृद्धावस्था में भी देखने में अत्यंत सुन्दर था। वक़्त ने उसके लम्बे कद को अभी झुकाया नहीं था, नाही उसके चुस्त दिमाग को थकाया था, इसीलिए वह नए दौर के साथ कदम से कदम मिला कर जी रहा था। अर्थात वह वृद्ध बड़ा ही समझदार था इसीलिए समय के साथ उसने खुद को नयी तकनीक से जोड़ कर रखा और आगे बढ़ता रहा। बेचारे वृद्ध के जीवन का एक ही दुःख था, उसका लकीर का फ़क़ीर, आलसी और आरामपसंद बेटा जिसको अपने वृद्ध पिता के स्वास्थ्य की चिंता बिलकुल नहीं थी। अपने बेटे के आलस से परेशान वह वृद्ध अपने बेटे को “लफददू” बुलाने लगा।

लफ़ददू - बोमन ईरानी और वरुण शर्मा

पिता-पुत्र दोनों ख़ुशी से जीवन व्यतीत कर रहे थे लेकिन एक दिन पिता कि तबियत अचानक ख़राब हो गयी। वृद्ध ने लफददू को बहुत समझाया कि  वह medlife एप्प को अपने फ़ोन पर डाउनलोड करके दवाइयाँ मंगवा ले, हालांकि यह आसान रास्ता था लेकिन लफददू-लाल कहाँ किसी की सुन ने वाले थे, इसीलिए पिता की बात पर ध्यान ना देते हुए, लफददू जा पहुंचे दवा-खाने और ज़रूरत कि दवाइयाँ ख़रीद लाये।

अगले दिन लफददू के पिता ने उसको फिर समझाया की वह ज़रूरत की सारी दवाइयाँ medlife से मंगवा ले। वृद्ध ने तो लफददू को यह तक याद दिलाया की medlife से दवाइयाँ मंगवाने पर उसे दवाओं के दाम पर 75% तक की छूट भी मिलेगी! लेकिन अपने लफददू कम समझदार तो थे नहीं, इसीलिए दवाखाने जा कर दवाओं को उनके दाम के अनुसार ही खरीदा। मौसम बदल गए लेकिन हमारा लफददू नहीं बदला। फिर एक रात ऐसी आई जहाँ लफददू के पिता अचानक से बीमार पड़ गए, लफददू को बड़ी चिंता हुई, उसने पूरा घर छान मारा अपने पिता की दवाइयों के लिए लेकिन कम्बख्त दवाइयाँ कहीं मिली ही नहीं। बेचारे लफददू ने दवाओं की तलाश में पूरा घर सर पे उठा लिया लेकिन उसके हाथ सिर्फ दवाओं के कोरे खोल लगे। लफददू का दिल बैठने लगा, उसके पिता को दवाओं की सख्त ज़रूरत थी, वह सोच ही रहा थी की क्या करे की अचानक उसे अपने पिता के सुनहरे शब्द याद आये “लफददू बेटा, medlife एप्प डाउनलोड कर।” बस फिर क्या था लफददू ने तुरंत अपना फ़ोन निकाला और medlife एप्प डाउनलोड किया। बस फिर तो चिंता कि कोई बात ही नहीं थी, दवाइयाँ वक़्त रहते उसके घर पर पंहुचा दी गयी और लफददू-लाल के पिता पलक झपकते ही ठीक हो गए।

लफददू लाल…

इस वाक्ये ने लफददू को एक ज़िम्मेदार इंसान बना दिया। हमारे लफददू ने दवाओं के साथ-साथ एप्प के माध्यम से ज़रूरत की दवाओं कि महीने के अंत में दोबारा भराई का इंतज़ाम भी कर लिया ताकि घर में समय पर दवाएं आ जाएँ और उस रात जैसी परिस्थिति कभी खड़ी ना हो। अब लफददू के पिता को अपने बेटे पर बड़ा नाज़ है इसीलिए साहब ने आजकल उन्हें “लफददू” बुलाना छोड़ दिया है।

अब आप बताइये, इस छोटी और प्यारी सी कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? हमें उम्मीद है कि आपको इस कहानी का असली मकसद समझ आ गया है। जो लफददू के साथ हुआ वह किसी के साथ भी हो सकता है खासतौर पर अगर आप खुद “लफददू” हों या ऐसे इंसान हों जिनकी शकल पर हमेशा एक ही भाव होता है: “मुझे नहीं पता मेरे आस-पास क्या हो रहा है” भाव। हमें दुनिया के ऐसे सभी लफददूओं पर पूरा भरोसा है कि आप भी हमारे लफददू-लाल जैसे समझदार और ज़िम्मेदार बन सकते हैं। कोशिश तो करिये, वैसे भी कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। ज़रा सोचिये सिर्फ एक एप्प डाउनलोड करते ही आप “लफददू-लाल” से “चतुर-चंद” बन सकते हैं। वैसे भी अपने बड़ों से अपने लफददूपन के लिए डांट खाना किसको पसंद है? मज़े  कि बात तो यह है कि ऐसा करने से आप अपने माता-पिता को प्रसन्न करेंगे ही साथ ही साथ medlife के फायदे अपने अन्य परिवारजन जैसे चाचा, चाची, मौसा, मौसी, मामा, मामी, यहाँ तक कि दूर के रिश्तेदारों को बता कर उनकी नज़र में भी चढ़ जाएंगे।

अगर आपको अभी भी लफददू का मतलब समझ नहीं आया है तो Medlife कि प्रस्तुति “लफददू” माला को ज़रूर देखें और अपने दोस्तों को भी दिखाएं।

“लफददू” माला कि मेकिंग: वीडियो देखने के लिए नीचे दिए लिंक्स पर जाएँ  

लफददू” श्रृंखला 1 – बोमन ईरानी (परदे के पीछे के लम्हे)Boman Irani (Behind the Scenes)

लफददू” के किस्सों कि मेकिंग में बोमन ईरानी के परदे के पीछे के शॉट्स देखें। इस वीडियो में बोमन ईरानी “लफददू लाल” को अलग-अलग आवाज़ों में बोलने का अभ्यास कर रहे हैं। एक प्रतिभाशाली कलाकार कि कार्यनिष्ठा का मनमोहक प्रदर्शन है इस वीडियो में।

लफददू” श्रृंखला २ – वरुण शर्मा (परदे के पीछे कि झलक)

लफददू मत बनो, Medlife डाउनलोड करो” कि सलाह तो आपको वरुण शर्मा (हमारे लफददूलाल) भी देंगे। फुकरे फिल्म में अपने नाट्य प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए विख्यात इस कलाकार को अलग-अलग और अतरंगी तरीकों से अपनी बात ज़ाहिर करने का अभ्यास करते हुए देखने के लिए, ऊपर दिए लिंक पर क्लिक करें।

लफददू” श्रृंखला 3 – बोमन ईरानी और वरुण शर्मा (परदे के पीछे कि झलक)

यह पिता-पुत्र के रिश्ते को दर्शाती वीडियो कि शुरुआत वीडियो निर्माता के “रोलिंग, एक्शन” कि बात से होती है। निर्माता के “एक्शन” कहने के तुरंत बाद से वरुण और बोमन अपने किरदार में आ जाते हैं और पिता-पुत्र और लफददू की कहानी में जान फूँक देते हैं। इन दोनों अभिनेताओं के अभ्यास का अंदाज़ भी बड़ा मज़्ज़ेदार है, विश्वास ना हो तो वीडियो के लिंक पर क्लिक करके खुद देख लें!

लफददू” श्रृंखला 4 – बोमन ईरानी और मंडली (परदे के पीछे के लम्हें)

इस परदे के पीछे कि झलक में बोमन ईरानी 80 वर्ष से ऊपर के लोगों की एक मंडली को “लफददू” कहना सीखा रहे हैं। देखने वालों के लिए यह लम्हे बड़े ही रमणीक थे, हमने सोचा ऐसी मस्ती का मज़ा तो सबको मिलना चाहिए, तो लीजिये प्रस्तुत हैं हमारे सबसे ऊर्जावान कलाकार!

English Summary:

Meaning of “Lafaddu” and adventures of “Lafaddu Lal” is explained in simple Hindi.

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