नकली दवाएँ – भारत में बढ़ता हुआ खतरा

    0

    एक नए व्यापार ने दुनिया भर में भारी कदम उठाए हैं और यह भारत को भी प्रभावित कर रहा है – घटिया और नकली दवाओं कि खरीद और बिक्री का व्यापार। यह हर जगह तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। ये नकली दवाएं रोगी को ठीक नहीं करती हैं। इसके बजाए, वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मौत जैसी अधिक समस्याएं पैदा करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संस्था के अनुसार यह समस्या  विकासशील देशों में और अधिक तेज़ी से फैल रही है और परेशानी कि बात यह है कि लोग इस समस्या के बारे में पूरी तरह से अवगत नहीं हैं। इसके अलावा, विकासशील देशों में वित्तीय बाधाएं लोगों को निर्धारित दवाओं के सस्ता संस्करण खरीदने के लिए मजबूर करती हैं।

    नकली दवाएँ भारत में बढ़ता हुआ खतरा

    नकली दवाओं की समस्या

    नकली दवाएँ किसी व्यक्ति को ठीक नहीं करती हैं लेकिन उनकी समस्याओं में वृद्धि कर सकती हैं, जिससे इलाज पर अधिक खर्च होता है। नकली दवाएँ लोगों में एंटीमाइक्रोबीएल प्रतिरोध को बढ़ावा देती हैं, इस प्रकार सच्ची दवा के प्रभाव को खत्म कर देती हैं। विदेश में यात्रा करते समय ऐसा व्यक्ति उस क्षेत्र के अन्य लोगों को ऐसे उत्परिवर्ती संक्रमण का शिकार बना सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, आर्टेमिसिनिन नामक एंटी-मलेरिया दवा का एक घटिया संस्करण आज दुनियाभर के बाज़ारों में मौजूद है। यह निम्न गुणवत्ता वाला संस्करण वास्तविक दवा के प्रतिरोध का निर्माण करता है। यह उन देशों में प्रचलित है जहां उत्पादित दवाओं का 38% से 90% नकली या घटिया है। दुर्भाग्यवश, भारत उन देशों की श्रेणी में पड़ता है जिनमें बाजार में फैली नकली दवाओं की खतरनाक मात्रा है।

    चिंताजनक तथ्य यह है कि हर बीमारी के लिए नकली दवाएँ हैं। वे कैंसर से गर्भनिरोधक और एंटीबायोटिक्स से लेकर टीकों तक कई बीमारियों / उपचारों के लिए उपलब्ध हैं। रिपोर्टों के अनुसार कम और मध्यम आय वाले देशों में फैले 10 में से 1 चिकित्सा उत्पाद नकली हैं या घटिया हैं।

    15 साल पहले भारत में पहली बार चिकित्सा उत्पादों की बिक्री 500 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी। तब से यह राशि दुगुनी हो कर 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गयी है। आम जनता की ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़ का यह खेल बहुत की तेज़ी से बढ़ रहा है।दवाओं कि बड़ी संख्या का आकलन नकली और घट��या दवाओं की बिक्री का संकेत दे सकती है। एक अनियमित वेबसाइट से लेकर स्थानीय सड़क विक्रेताओं तक, नकली दवाएं हर जगह हो सकती हैं। आपको बस इतना करना है, खरीदने से पहले सावधान रहें।

    संबंधित: नकली दवाओं की जांच के लिए 10 तरीके

    लोग अस्वीकृत विक्रेताओं पर भरोसा क्यों करते हैं?

    वजन घटाने, लिंग दोष या लत के मामलों में लोग अक्सर डॉक्टर से मदद मांगने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं। ऐसे लोग, खुद ही दवाएँ खोजने की कोशिश करते हैं और यही वह जगह है जहां नकली दवा बनाने और बेचने वाले लाभान्वित होते हैं। लोग इंटरनेट के माध्यम से मदद लेते हैं और ठीक से जांच किए बिना ऑनलाइन दवाएँ खरीदते हैं, ऐसा करने से वह बड़ी ही आसानी से नकली दवाओं के काले जाल में फस जाते हैं।

    पैकेजिंग, दवा बनाने और उसको पैकेजिंग करके बिक्री के लिए तैयार करने का काम अलग-अलग देशों में होता है, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। यह विशाल व्यवसाय रोज़ाना बढ़ रहा है, और दुनिया को खतरे में डाल रहा है।

    नकली दवाओं के फैलाव पर रोक कैसे लगाया जाए?

    गणना करना मुश्किल है लेकिन रिपोर्ट का अनुमान है कि नकली दवाओं के कारण हर साल 1,00,000 से 10,00,000 लोगों कि मौत होती है। यह खतरा भारत में लगातार बढ़ता ही जा रहा है और जागरूकता में कमी के कारण इस खतरे कि सीमा का कोई अनुमान नहीं लगाया जा पा रहा है।

    नकली दवाइयों कि इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए यह ज़रूरी है कि सरकार, दवा कम्पनियाँ और मरीज़ एक जुट हो कर आगे बढ़े। लोगों को अधिक सावधान रहना चाहिए और अनधिकृत ऑनलाइन स्रोतों से दवाओं को नहीं खरीदना चाहिए। उन्हें दवा जारी करने वाली कंपनी के लाइसेंस के साथ दवा की उत्पत्ति की सत्यता कि जांच करनी चाहिए। दुनिया भर में आपूर्ति की गई नकली दवाओं में से 75% की उत्पत्ति भारत में हुई है, इसके बाद मिस्र से 7% और चीन से 6% है। यह एक चिंताजनक बात है क्योंकि इसमें से अधिकांश नकली दवाइयाँ भारत में अधिक मात्रा में उपभोग की जाती है। यह सब वास्तविक दवाओं के लिए सत्यता को स्थापित करने के लिए एक विशेष प्रणाली के निर्माण को अनिवार्य बनाता है, जिस से कोई भी नागरिक नकली दवाओं के जाल में न फसें। ।

    मेडलाइफ को क्यों चुनें?

    मेडलाइफ अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं से वास्तविक दवाएँ स्रोत करता है और केवल उच्चतम गुणवत्ता वाली दवाएँ प्रदान करने पर केंद्रित है। योग्य फार्मासिस्ट दवाइयों को पैक करने के लिए जिम्मेदार हैं। जब तक आपका आर्डर  आपके हाथ तक नहीं पहुंच जाता तब तक वे उन्हें प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए होलोग्राम से सील करते हैं। ऐसी दुनिया में जो नकली दवाओं के कारण बेहद खतरनाक हो रही है, मेड लाइफ अपने मेडिकल उत्पादों को आप तक पहुंचाने से पहले उनकी गुणवत्ता कि पूरी तरह से जांच करता है।

    कोई जवाब दें

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.