नकली दवाइयों की पहचान करने के 10 तरीके

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    विश्व स्वास्थ्य संस्था यानि की WHO की नवंबर 2017  की शोध रिपोर्ट के अनुसार कम आय और मध्यम आय देशों में हर 10  में से लगभग 1 चिकित्सा उत्पाद या तो निचली स्तर का होता है, या नकली होता है। यह नकली दवाइयों का धंधा सिर्फ एक देश या जाति-वर्ग की चिंता नहीं है अपितु पूरे विश्व और इंसानियत के लिए चिंता का विषय है।

    नकली दवाइयों की पहचान करने के 10 तरीके

    नकली उत्पादों को पहचानना एक कठिन कार्य है। ख़ास तौर पर तब जब कुछ दवाइयाँ बिलकुल ही नकली होती हैं लेकिन शरीर को तुरंत नुक्सान नहीं पहुँचाती हैं और कुछ ऐसी होती हैं जिनका शरीर पर कोई असर ही नहीं होता है। हालांकि इस बात पर ध्यान अवश्य देना चाहिए की नकली दवाइयों के सेवन से कई नुक्सान हो सकते हैं, जैसे वक़्त पर सही इलाज ना मिलना या अन्य जानलेवा दुष्प्रभाव। आमतौर पर उपभोक्ताओं के पास नकली दवाइयों को पहचानने के साधन उपलब्ध नहीं होते लेकिन कुछ ऐसे तरीके हैं जिनका उपयोग करके आप और हम नकली दवाओं को घर बैठे पहचान सकते हैं और उनके दुष्प्रभाव से खुद को बचा सकते हैं।

    भारत में नकली दवाओं की पहचान के तरीके-

    भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में नकली दवाओं का सेवन एक बड़ी चिंता का विषय है। दवाओं की उत्पाद का कार्य अत्यंत ही लाभदायक है लेकिन ब्रांडेड कंपनियों द्वारा बनाई गई दवाइयाँ गरीब जनता के लिए बहुत ही महंगी पड़ जाती हैं, ऐसे में ब्रांड के नाम की ही सस्ती और नकली दवाइयों का धंधा कुछ लोगों को बहुत फ़ायदा पहुँचाता है। किसी भी दवा की सत्यता की परख करना कोई आसान काम नहीं है लेकिन इन तरीकों की मदद से ऐसा करना सिर्फ मुमकिन ही नहीं आसान भी है।

    1) पैकेजिंग की जांच करें:

    किसी भी दवा की सत्यता जाँचने का सबसे सरल और आसान तरीका है उसकी पैकेजिंग पर ध्यान देना। अगर आपके मन में किसी भी प्रकार का संदेह है तो दवा की तह को असामान्य लेख, प्रिंट का रंग और वर्तनी की अशुद्धता के लिए जांचे। तस्सली के लिए इस दवा की तह को अपनी असली दवा की तह से मिलाएँ।

    2) ध्यान दे की दवा की सील टूटी हुई ना हो:

    दवा की शीशी खरीदने से पहले इस बात पर विशेष ध्यान दें की शीशी का सुरक्षा मोहर टूटा ना हो। अपनी सेहत के हित का ध्यान रखते हुए अगर दवा की शीशी की मोहर पे कोई दरार या नुक्सान हो तो उस दवा को ना खरीदे। दवा की पट्टी खरीदते वक़्त भी इस बात का विशेष ध्यान रखें की पट्टी या उसमें बंद दवा को किसी तरह का कोई नुक्सान ना पहुंचाया गया हो।

    3) गोली और गोली की मात्रा बनाने की विधि की जांच करें:

    दवा की दिखावट, रंग, आकार, एकरूपता, घनापन आदि में विषमता की जांच करें। अगर आपको निम्न किसी भी घटक में विषमता नज़र आए तो उस दवा को या तो ना ख़रीदे या उसका सेवन ना करें।

    4) गोलियों की शारीरिक विशेषताओं पर ध्यान दें:

    विश्व स्वस्थ्य संस्था के अनुसार नीचे विख्यात शारीरिक विशेषताओं की जांच से दवाओं की सत्यता की जांच की जा सकती है। यह विशेषताएँ कुछ इस प्रकार हैं:

    • दवा के डिब्बे में गोलियों के छोटे टुकड़े मिलना या हद से ज़्यादा दवाओं का चूरन मिलना।
    • गोलियों में दरार मिलना।
    • दवा के डिब्बे की दीवार पर या खुद गोलियों पर माणभ का मिलना।
    • गोलियों का मुलायम या सख्त होना।
    • दवाओं का रंग उड़ना या गोलियों में सूजन या स्पॉटिंग होना।

    5) दवा का सेवन करने के बाद तीव्र-प्रतिक्रिया होना या अप्रत्याशित दुष्प्रभाव होना:

    इंसानी शरीर अधिकतर दवाइयों पर सौम्य प्रतिक्रिया प्रदर्शित करता है इसीलिए यह बहुत ज़रूरी हो जाता है की आप एक डॉक्टर से लगातार सलाह लेते रहें जिससे किसी भी दवा की तीव्र-प्रतिक्रिया से शरीर को बचाया जा सके। डॉक्टर से सलाह लेने के बाद भी अगर आप किसी दवा के सेवन से कोई अप्रत्याशित तीव्र-प्रतिक्रिया या दुष्प्रभाव का सामना करते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करें।

    6) दवाइयों के मूल्य में अंतर:

    अगर आपकी दवा का मूल्य अचानक से बहुत काम हो जाए तो उस दवाई की अच्छे से जांच करें। अक्सर यह देखा गया है की सस्ती दवाओं का लोभ दे कर कुछ गलत कम्पनियाँ उपभोक्ताओं को अपने जाल में फसा कर उन्हें नकली दवा बेचने की चेष्ठा करती हैं।

    7) दवाओं की शुद्धता की जांच ऑनलाइन या SMS के द्वारा करें:

    PharmaSecure नाम की एक संस्था ने दवा उत्पादकों के साथ मिल कर नकली दवाओं के आतंक को ख़तम करने की एक मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के अंतर्गत हर दवा की पट्टी या डिब्बे पर एक अद्वितीय पहचान संहिता या यूनिक आइडेंटिफिकेशन कोड होगा। उपभोक्ता इस संहिता या कोड को 9901099010 पर SMS कर सकते हैं, इस मैसेज को भेजने के साथ ही उपभोक्ता को अपने मोबाइल पर दवा उत्पादक कंपनी से एक प्रमाणीकरण मैसेज मिलेगा। इस प्रमाणीकरण मैसेज से दवा की सत्यता का पता आसानी से लगाया जा सकता है।

    उपभोगता दवाइओं की सत्यता जान ने के लिए PharmaSecure की वेबसाइट का भी प्रयोग कर सकते हैं। वेबसाइट के द्वारा सत्यता जान ने की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है:

    • PharmaSecure की वेबसाइट पर जाएँ।
    • अपने देश को चुनें।
    • अपना मोबाइल नंबर डालें और उसके बाद प्रमाणीकरण कोड जो दवा के डिब्बे या पट्टी पर लिखी है उसको डालें।
    • “Verification” अर्थात प्रमाणीकरण शब्द डालें और “VERIFY” बटन अर्थात सत्यापित करें बटन पर क्लिक करें।

    यह करने के बाद आपको उत्पादक से उत्पाद की सत्यता को प्रमाणित करते हुए एक SMS मिलेगा।

    प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के समय इन दो बातों पर ध्यान दें:

    • प्रमाणीकरण कोड और बैच संख्या अलग-अलग होते हैं।
    • चूँकि यह प्रक्रिया बहुत नयी है, ऐसा हो सकता है की फिलहाल प्रमाणीकरण कोड हर दवा पर ना हो कर सिर्फ महंगी दवाओं पर उपलब्ध हो।

    8) गलत विक्रेताओं से बचें :

    दवाइयों के उद्योग में एक ही बीमारी के लिए कई दवाओं की भरमार है। ऐसे में दवा किसी नामी विक्रेता से खरीदना चाहिए और जहाँ कोई भरोसे लायक विक्रेता ना मिले वहां किसी नामी कंपनी की दवाई खरीदनी चाहिए। ऐसा करने से आपके गलत या नकली दवा खरीदने की संभावना काम हो जाती है। ऐसे विक्रेता जिनको दवाओं की जानकारी कम हो या बिलकुल ही ना हो उनसे दवाइयाँ खरीदने में सावधानी बरतनी चाहिए।

    9) दवा की पट्टी या डिब्बे पर दी गई जानकारी की जांच करें:

    दवा की पट्टी या डिब्बे पर दी गयी जानकारी जैसे समाप्ति तिथि, बैच संख्या और दवा की अंदर के पैकेज पर दिए गए उत्पादक के पते की अच्छे से जांच कर लें, यह तीनों चीज़ें दवा के बाहरी पैकेजिंग पर दी गई जानकारी से मेल खानी चाहिए। दवा की सत्यता का पता दवा की बैच संख्या की ऑनलाइन जांच करने से भी लगाया जा सकता है।

    10) उत्पादक के पते को सत्यापित करें:

    किसी भी नामी उत्पादक के पते को सत्यापित करना आसान है क्योंकि उनकी मार्गन प्रणाली या ट्रैकिंग सिस्टम अच्छी तरह से स्थापित होती है, लेकिन यही बात किसी नकली दवा के उत्पादक के लिए सत्य नहीं होगी। अगर आपकी दवा के डिब्बे पे उत्पादक के देश के नाम के अलावा उत्पादक का पता है ही नहीं, या उत्पादक के पते को सत्यापित किया ही नहीं जा सकता, तब ऐसी दवा का सेवन तुरंत छोड़ दें या शुरू ही ना करें।

    आपके स्वस्थ्य पर नकली दवाओं के सेवन का संकट:

    नकली दवाओं के सेवन का आपके शरीर पर घातक परिणाम हो सकता है। निम्नलिखित कुछ आम परिणाम हैं जिनकी जानकारी सबको होनी चाहिए:

    • दवा में सक्रिय घटक  या एक्टिव इंग्रेडिएंट की मात्रा सही ना होने से दवा की सक्रियता पर असर पड़ सकता है जिसकी वजह से या तो दवा सही तरह से काम नहीं करेगी या शरीर में उसकी मात्रा ज़हरीले स्तर की हो जाएगी।
    • दवा में कोई और सक्रिय घटक के मौजूद होने की सम्भावना हो सकती है।  ऐसी सूरत में बीमार व्यक्ति घातक दुष्परिणाम के शिकार हो सकते हैं।
    • दवा को बनाने की प्रक्रिया सही ना हो या औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा स्थापित नीतियों के अनुसार ना हों, जिस से दवा में कई तरह के जानलेवा दोष हों।
    • गलत सामग्री व बनाए जाने की तकनीक के कारण दवा में विषैले पदार्थ के होने की सम्भावना बनी रहती है।
    • नकली दवा की पैकेजिंग या बाहरी खोल पर उत्पादक का विवरण जाली हो सकता है।
    • दवाओं को गलत तरीके से संग्रह करने की वजह से दवाओं के विषैले होने की सम्भावना बनी रहती है। उसी प्रकार अगर दवाओं को गलत तरीके से अपवाहित या ढोया जाए तो उनके खराब या विषैला होने की संभावना बढ़ जाती है।

    फिलहाल भारतीय बाज़ार में हज़ारों तरह की नकली दवाइयाँ बिक रही हैं और इन दवाइयों से होने वाले नुक्सान का आंकड़ा लगाना नामुमकिन है। इस बात पर ज़ोर देना अत्यंत आवश्यक है की ऐसी नकली दवाइयाँ नुक़सानदेह और ज़हरीली हैं एंड इनसे दूरी बरतने में ही आपकी सेहत का हित है। ऊपर व्याख्यात तरीकों का इस्तेमाल करके आप अपने और अपने प्रियजनों को नकली दवाओं के आतंक से बचा सकते हैं और इस प्रकार नकली दवाओं से छुटकारा पाने की जंग में अपना योगदान दे सकते हैं।

    English Summary:

    10 ways of checking for fake medicines explained in simple Hindi.

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